इस प्रकार हुई थी कलयुग की शुरुआत रोंगटे खड़े कर देने वाला सच
इस प्रकार हुई थी कलयुग की शुरुआत रोंगटे खड़े कर देने वाला सच पुराणों में चार युगों का वर्णन मिलता है सतयुग द्वापर युग त्रेता युग और कलियुग। कलयुग को एक श्राप कहा जाता है। पर क्या आपको पता है कि पृथ्वी पर कलयुग कैसे आया और कैसे इसकी शुरुआत हुई। महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने अपनी पुस्तक आर्यभट्टम मैं इस बात का उल्लेख किया है कि जो भी 23 वर्ष के थे तब कलयुग का 3600 वा वर्ष चल रहा था। आंकड़ों के अनुसार आर्यभट्ट का जन्म 476 ईसवी में हुआ था। मतलब कहना की जाए तो कलयुग का जन्म 3102 ई. पु हो चुका था। जब धर्मराज युधिष्ठिर अपना पूरा राज पाट राजा परीक्षित को सौंपकर सभी पांडवों के साथ हिमालय की ओर चले गए थे। उन दिनों युधिष्ठिर स्वयं बैल का रूप ले कर गाय के रूप में बैठी पृथ्वी को सरस्वती नदी के किनारे मिले। तब पृथ्वी के नयन आंसुओं से भरे हुए थे। उनकी आंखो से लगातार अश्रु बह रहे थे। उनके सूरत देखकर धर्म ने उनसे उनकी परेशानी का कारण पूछा। तब पृथ्वी ने कहा की है धर्म तुम तो सब जानते हो फिर भी मेरे दुखों का कारण पूछने का क्या लाभ। सत्य, पवित्रता, दया, धर्म, त्याग, वैराग्य, निर्भरता, ऐश्वर्य, के धनी श्र...