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बेटियों के जन्म के लिए कैसे घर को चुनते हैं भगवान

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  बेटियों के जन्म के लिए कैसे घर को चुनते हैं भगवान ? दोस्तों, कहते हैं कि बेटे भाग्य से होते हैं और बेटियां सौभाग्य से। यह कहना एकदम सही है, बेटियों से घर की रौनक अलग होती है। कहा जाता है कि जिस घर में बेटी का जन्म होता है वो घर स्वर्ग के समान होता है। क्योंकि बेटा तो केवल एक कुल को रौशन करता है लेकिन बेटियां दो कुलों को रौशन करती हैं। अगर अपने सास ससुर के लिए भी करना हो तो बेटियां करती हैं। आपको बता दें… गया जी में बेटियां भी अपने पिता के नाम का पिंड दान कर सकती हैं। वहीं अगर ससुराल पक्ष में कोई पुरूष नहीं हैं तो इस स्थिती में बहु भी पिंड दान कर सकती है। रामायण के अनुसार दशरथ जी का पिंड दान गया जी में ही किया था।  दोस्तों, वो बहुत किस्मत वाले होते हैं जिनके घर एक बेटी जन्म लेती है। वहीं वो प्रबल किस्मत के होते हैं जिनके घर एक से ज्यादा बेटियां होती हैं। शायद यही कारण है कि बेटियों को लक्ष्मी कहा गया है। वहीं बहुत से लोगों की सोच यही होती है कि बेटी है तो बिना समय गवाए और इस पर पढ़ाई में पैसे लगाए जल्द से जल्द शादी कर दो। लेकिन यह सोच एक बेटी के भविष्य को बर्बाद कर देती है। ज...

बनारस के शमशान घाट में क्यों नाचती है वैशयाएं?

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 बनारस के शमशान घाट में क्यों नाचती है वैशयाएं?  क्या आप जानते है.. जिस बनारस को हिंदु धर्म का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है.. उसी बनारस में वैशायएं लोगों की मौत पर नाचती है.. यानि की एक ओर जहां लोग अपनों के मरने का दुख मनाते है… वही दूसरी ओर वैशायओं के घुंघरु रुकने का नाम नहीं लेते.. आखिर क्या है इसके पीछे का रहस्य.. दोस्तों इसके पीछे का राज जानकर आप चौंक जायेंगे… दरअसल, काशी के मर्णिकर्णिका घाट पर हर साल चैत्र नवरात्र की सप्तमी को महाशमशान महोत्सव मनाया जाता है.. मान्य़ता है कि इस दिन काशी के राजा भगवान शिव अदृश्य रुप से इस पूरे महोत्सव में शामिल होते है… और तब इस घाट में वैश्याएं बेहिचक नृत्य करती है.. यानी की एक तरफ चिता की लपटे उठ रही होती है.. तो वहीं दूसरी ओर वैश्याओं के घुंघरुओं की झनकार बज रही होती है… मर्णिकर्णिका घाट पर लोगो के रोने और तबले की थाप का यहां अनोखा संगम सभी को हैरान कर देता है। कहा जाता है कि इस नाच- गाने के जरिये… वैश्याएं महादेव के लिए अपनी भक्ति भावना प्रकट करती है… उनका मानना है कि सभी को तारने वाले भगवान शिव क्या उनकी इस सेवा को स्वीकार नहीं करेगे...

Veg और Nonveg खाना पाप है या पुण्य जानिए क्या कहते है वैद

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 Veg और Nonveg  खाना पाप है या पुण्य जानिए क्या कहते है वैद वैसे तो भोजन में क्या खाएं और क्या न खाएं यह मनुष्य का निजी व्यक्तिगत फैसला होता है  लेकिन यहां हिंदू धर्म में कुछ लोग मासाहरी भोजन को निषेध मानते हैं।  और दूसरी ओर मास खाने वाले लोग फल और सब्जियां खाने वाले को घास फूस खाने वाला बोलते हैं।  और दूसरी ओर मांस खाने वाले को साकाहारी लोग जानवरो पर अत्याचार करने वाले मानते हैं। तो आइए जानते हैं कि हिंदू धर्म के अनुसार मांसाहारी और साकाहारी में से किसको सर्वोत्व माना गया हैं। हिंदू धर्म में मांस खाना सही है या नही इस बात को लेके काफी लोगो के मन में भर्म में लेकिन लोगो के मन में वेदों को लेके बैठी शंकाए है। जिसके कारण वह समझते हे कि वेदों में मांस और पशुबली आदि का विधान है। वेद और पुराण हिंदू धर्म के मुख्य ग्रंथ है।  वेदों में पशु हत्या पाप मानी गई है। और मांस खाने के संबध में स्पष्ट मना किया गया है। इतना ही नहीं कुछ वेदों में तो मांस खाने को लेकर सख्त हिदायतें दी गई है।  यजुर्वेद में तो कहा गया है कि मनुष्य को हर आत्मा को अपनी आत्मा की तरह तुल्य मानन...