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Showing posts from July, 2023

इस शिवलिंग की पूजा क्यों करते हैं मुस्लमान

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  इस शिवलिंग की पूजा क्यों करते हैं मुस्लमान दोस्तों वैसे तो आपने देखा होगा कि हिंदू अपने मंदिरों में अपने भगवान की पूजा करते हैं और मुस्लमान अपने मस्जिद जाकर, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि भगवान शिव का एक शिंवलिंग ऐसा भी है, जिसकी पूजा हिंदू तो करते ही है साथ ही मुस्लमान भी करते हैं। पर सोचने वाली बात है कि महादेव के उस शिवलिंग की पूजा आखिर मुस्लमान क्यों करते हैं.. दरअसल, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से लगभग 25 किलोमीटर दूर एक झारखंडेश्वर शिव नाम का महादेव का मंदिर है। इस मंदिर के शिवलिंग पर एक कलमा गुदा हुआ है, जो कि मुस्लमानों के लिए बहुत पवित्र माना जाता है, इसलिए उस शिवलिंग पर जितनी आस्था हिंदूओं की हैं उतनी ही मुस्लमानों की भी है। लेकिन अब सोचने वाली बात ये है कि आखिर शिवलिंग पर कलमा किसने गुदवाया और क्यों आपको बता दें, ये शिवलिंग स्वयंभू शिवलिंग है। यानी कि ये धरती से खुद निकला था, इसलिए इस शिवलिंग की बहुत मान्यता है। जब मोहम्मद गजनवी भारत आया, तो उसने महादेव के इस शिवलिंग को चुराने की कोश्शि की, लेकिन जब वो उस शिवलिंग को नहीं ले जा पाया, तो उसने शिवलिंग पर ही उर्दू भाषा मे...

बेटियों के जन्म के लिए कैसे घर को चुनते हैं भगवान

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  बेटियों के जन्म के लिए कैसे घर को चुनते हैं भगवान ? दोस्तों, कहते हैं कि बेटे भाग्य से होते हैं और बेटियां सौभाग्य से। यह कहना एकदम सही है, बेटियों से घर की रौनक अलग होती है। कहा जाता है कि जिस घर में बेटी का जन्म होता है वो घर स्वर्ग के समान होता है। क्योंकि बेटा तो केवल एक कुल को रौशन करता है लेकिन बेटियां दो कुलों को रौशन करती हैं। अगर अपने सास ससुर के लिए भी करना हो तो बेटियां करती हैं। आपको बता दें… गया जी में बेटियां भी अपने पिता के नाम का पिंड दान कर सकती हैं। वहीं अगर ससुराल पक्ष में कोई पुरूष नहीं हैं तो इस स्थिती में बहु भी पिंड दान कर सकती है। रामायण के अनुसार दशरथ जी का पिंड दान गया जी में ही किया था।  दोस्तों, वो बहुत किस्मत वाले होते हैं जिनके घर एक बेटी जन्म लेती है। वहीं वो प्रबल किस्मत के होते हैं जिनके घर एक से ज्यादा बेटियां होती हैं। शायद यही कारण है कि बेटियों को लक्ष्मी कहा गया है। वहीं बहुत से लोगों की सोच यही होती है कि बेटी है तो बिना समय गवाए और इस पर पढ़ाई में पैसे लगाए जल्द से जल्द शादी कर दो। लेकिन यह सोच एक बेटी के भविष्य को बर्बाद कर देती है। ज...

बनारस के शमशान घाट में क्यों नाचती है वैशयाएं?

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 बनारस के शमशान घाट में क्यों नाचती है वैशयाएं?  क्या आप जानते है.. जिस बनारस को हिंदु धर्म का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है.. उसी बनारस में वैशायएं लोगों की मौत पर नाचती है.. यानि की एक ओर जहां लोग अपनों के मरने का दुख मनाते है… वही दूसरी ओर वैशायओं के घुंघरु रुकने का नाम नहीं लेते.. आखिर क्या है इसके पीछे का रहस्य.. दोस्तों इसके पीछे का राज जानकर आप चौंक जायेंगे… दरअसल, काशी के मर्णिकर्णिका घाट पर हर साल चैत्र नवरात्र की सप्तमी को महाशमशान महोत्सव मनाया जाता है.. मान्य़ता है कि इस दिन काशी के राजा भगवान शिव अदृश्य रुप से इस पूरे महोत्सव में शामिल होते है… और तब इस घाट में वैश्याएं बेहिचक नृत्य करती है.. यानी की एक तरफ चिता की लपटे उठ रही होती है.. तो वहीं दूसरी ओर वैश्याओं के घुंघरुओं की झनकार बज रही होती है… मर्णिकर्णिका घाट पर लोगो के रोने और तबले की थाप का यहां अनोखा संगम सभी को हैरान कर देता है। कहा जाता है कि इस नाच- गाने के जरिये… वैश्याएं महादेव के लिए अपनी भक्ति भावना प्रकट करती है… उनका मानना है कि सभी को तारने वाले भगवान शिव क्या उनकी इस सेवा को स्वीकार नहीं करेगे...