झांसी की रानी की मौत का असली राज , जरूर जाने

झांसी की रानी की मौत का असली राज , जरूर जाने

स्वागत है दोस्तों आज का आज हम जानेंगे की रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु कैसे हुई थी।

अंग्रेजो की तरफ से कैप्टन रॉड्रिक्स एक ऐसा व्यक्ति था जिसने लक्ष्मीबाई को अपनी आंखों से लड़ते हुए देखा था। उन्होंने घोड़े की रस्सी अपने दांतो के तले दबाई हुई थी और दोनों हाथों से तलवार चला रही थी।
जब दामोदर को गोद लेने के दावे को अंग्रेजों ने गलत घोषित कर दिया तो लक्ष्मीबाई का झांसी का महल छोड़ना पड़ा था। उन्होंने एक तीन मंजिल की हवेली रानी महल में शरण ली थी। 1 दिन युद्ध में जब कैप्टन रोटेट्स ने कहा था कि वह खुद सबसे पहले रानी लक्ष्मीबाई पर वार करेंगे। लेकिन जब जब दो ऐसा करने की कोशिश करते थे तब तो बिरयानी के गढ़ सवार उन्हें घेर कर परास्त कर देते थे। कुछ देर उनका ध्यान भटकाने के बाद कैप्टन रानी की ओर बढ़ चला। कुछ क्षण बाद जनरल रोज की एक निपुण ऊंट वाली टुकड़ी ने एंट्री ली।
इतनी बड़ी सेना को देख कर भी रानी के सैनिक भागे नहीं लेकिन उनकी संख्या धीरे-धीरे कम हो गई। अचानक रानी ने आवाज लगाई थी मेरे पीछे आओ और वह युद्ध के मैदान से इस तरह घाटी के अंग्रेजों को समझ में नहीं आया कि वह कहां गई। रानी ने अभी एक मील का ही सफर तय किया था कि जनरल के घुड़सवार उनके पीछे आकर खड़े हो गए। जगह थी कोटा की सराय।
अचानक रानी को अपने शरीर के दाएं हिस्से में दर्द महसूस हुआ क्योंकि एक सांप के काटने से होता है। एक अंग्रेज सैनिक जिसे वह देख नहीं पाई थी उसने एक संगीन भोंक दी थी। वह एकदम से मुड़ी और अपनी और हमला करने वाले ब्रिटिश सैनिक पर पूरी तरह से टूट पड़ी। रानी को लगी चोट इतनी गहरी तो नहीं थी लेकिन उन्हें में से बहुत खून पड़ रहा था।
दौड़ते दौड़ते अचानक उनके सामने एक पानी का झरना आ गया। उन्होंने सोचा कि वह घोड़े की एक छलांग लगाएंगे और चना पार हो जाएगा। तब उन पर कोई वार नहीं कर पाएगा और ना ही कोई उन्हे पकड़ पाएगा। उन्होंने घोड़े की रफ्तार और तेज कर दी लेकिन नाले के पास आते ही घोड़ा एकदम से इतना रुका कि वे घोड़े की गर्दन पर लटक गई। तब उन्होंने महसूस किया कि उनके कमर के पीछे एक राइफल की गोली लग चुकी है।
रानी के भाई हाथ की तलवार छोड़कर जमीन पर गिर गई। उन्होंने अपने हाथ से कमर से निकलने वाले खून को रोकने की कोशिश की। तब तक एक अंग्रेज रानी के घोड़े के पीछे पहुंच चुका था और उसने रानी पर वार करने के लिए तलवार उठाई। रानी ने अपने दो हाथ में पकड़ी दूसरी तलवार को वार बचाने के लिए आगे किया लेकिन अंग्रेज सैनिक ने इतनी जोर से मारा कि उनके सिर फट गया और वह अंधी सी हो गई। तभी उनके एक सैनिक ने उन्हें देखा और वह छोड़ के पास आया मोरू ने उठाकर एक मंदिर के पास ले गया। रानी तब तक जीवित थी। उधर मंदिर के बाहर लगातार फायरिंग चल रही थी। और रानी धीरे धीरे होश खोती चली गई और उस दिन भारतवर्ष में एक अपना अमूल्य हीरा खो दिया था।

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