बेटियों के जन्म के लिए कैसे घर को चुनते हैं भगवान
बेटियों के जन्म के लिए कैसे घर को चुनते हैं भगवान ?
दोस्तों, कहते हैं कि बेटे भाग्य से होते हैं और बेटियां सौभाग्य से। यह कहना एकदम सही है, बेटियों से घर की रौनक अलग होती है। कहा जाता है कि जिस घर में बेटी का जन्म होता है वो घर स्वर्ग के समान होता है। क्योंकि बेटा तो केवल एक कुल को रौशन करता है लेकिन बेटियां दो कुलों को रौशन करती हैं। अगर अपने सास ससुर के लिए भी करना हो तो बेटियां करती हैं।
आपको बता दें… गया जी में बेटियां भी अपने पिता के नाम का पिंड दान कर सकती हैं। वहीं अगर ससुराल पक्ष में कोई पुरूष नहीं हैं तो इस स्थिती में बहु भी पिंड दान कर सकती है। रामायण के अनुसार दशरथ जी का पिंड दान गया जी में ही किया था।
दोस्तों, वो बहुत किस्मत वाले होते हैं जिनके घर एक बेटी जन्म लेती है। वहीं वो प्रबल किस्मत के होते हैं जिनके घर एक से ज्यादा बेटियां होती हैं। शायद यही कारण है कि बेटियों को लक्ष्मी कहा गया है।
वहीं बहुत से लोगों की सोच यही होती है कि बेटी है तो बिना समय गवाए और इस पर पढ़ाई में पैसे लगाए जल्द से जल्द शादी कर दो। लेकिन यह सोच एक बेटी के भविष्य को बर्बाद कर देती है।
जरा सोचिए एक बच्ची के मन में कितने सपने होते है कि उसे कुछ करना है। लेकिन यह सपने सिर्फ सपने ही रह जाते हैं। इसलिए अपनी बेटियों को सपने पूरे करने देने चाहिए। उन्हें जीवन में हर वह खुशी दें जो उन्हें मिलनी चाहिए। एक बेटे से ज्यादा एक बेटी हमेशा अपने माता-पिता के लिए सोचती है।
इसके साथ ही माता पिता को प्यार और अपनापन बेटी ही दिखा सकती है। बेटी के जन्म को एक जश्न की तरह मनाना चाहिए। माता पिता को बेटी को हमेशा एहसास दिलाना चाहिए कि वह कितनी खास है।
दोस्तों, बेटी कभी भी बाप पर बोझ नहीं होती है। वो सिर्फ अपने और अपने परिवार की किस्मत बनाने के लिए जन्म लेती है।
एक कथा की मानें तो एक बार दो दोस्त लंबे समय के बाद एक दूसरे से मिले। एक दोस्त ने दूसरे से उसके हाल पूछे तो जवाब में उसने कहा कि मेरे हाल तो एकदम बढिया हैं… और हो भी क्यों न मेरे दो बेटे जो हैं….
तभी वो अपने दोस्त से पूछता कि तेरे घर में कितने बच्चे हैं। दोस्त खुशी के साथ बताता कि मेरे घर में दो बेटियां हैं। उसका दोस्त भगवान का शुक्रियादा करता हुआ कहता की धन्य है उसके घर बेटियां नहीं… यह सुनकर बेटियों के पिता की आंखों में आंसू आ गए।
तभी उसकी बेटी पिता के मित्र से कहती कि अंकल भगवान हमेशा भग्यवान को ही बेटी देता कभी गरीब को बेटी के रूप में माता लक्ष्मी नहीं देता…
दोस्तों, भगवान उसी को पुत्री का सुख देता जिसके अंदर पालने की सामर्थता होती है। जो गरीब होकर भी अपनी बेटी को पाल सकता हो…
एक बार स्वामी विवेकानंद वैष्णो देवी की सीढ़ियां चढ़ रहे थे… बगल से एक किसान अपनी बेटी को कंढे में बिठाए चढाई चढ रहा था। तभी स्वामी विवेकानंद ने कहा कि बाबा आपकी बेटी का बोझा आपको लग रहा होगा इसको मैं उठा लेता हूं और माता वैष्णो के दरबार तक लिए चलता हूं…
तब किसान ने स्वामी विवेकानंद से कहा कि बेटी कभी भी बाप के कंधे पर बोझ नहीं होती… बेटियां अगर बाप के कंधे पर हो तो वो हर बोझ को हल्का कर देती हैं।
दोस्तों, बेटियां कभी भी धन की भूखी नहीं होती हैं.. वो सिर्फ मान और सम्मान की भूखी होती हैं।
अब सोचने वाली बात है कि कौन से कर्म के बाद आप किसी के घर लड़की के रूप में जन्म लेते हैं और उनके धर के लिए लक्ष्मी का रूप साबित होते हैं ।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जब आत्मा को नया जन्म मिलता तब आत्मा को उस शरीर के अनुसार व्यवहार में ढलकर अपने कर्म करने होते हैं। शरीर के जरिए कर्म करके ही एक आत्मा अपने जन्म के उद्देश्य को सार्थक भी बना सकती है और निरर्थक भी।
अगर कोई पुरुष महिलाओं का आचरण करता है, स्वभाव में महिलाओं वाली आदतें ले आता है या वही काम करना चाहता है जो एक महिला को करना चाहिए, तो ऐसे पुरुषों की आत्मा अगले जन्म में स्त्री का शरीर धारण करती है।
वहीं गरुड़ पुराण में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति मृत्यु के अंतिम क्षण में किसी स्त्री को याद करते हुए प्राण त्यागता है तो वो अगले जन्म में स्त्री के रूप में जन्म लेता है। वहीं अगर वो अंतिम क्षण में परमेश्वर का नाम लेता है तो वो मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है।

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