जबरन गिरफ्तारी पर हुई धक्का मुक्की, लोकेश गोदारा का संघर्ष

अजमेर. कुलपति और कुलसचिव के बगैर संचालित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में बुधवार को जबरदस्त हंगामा हुआ। छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। ढाई घंटे तक शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी अंदर नहीं जा सके। छात्रसंघ अध्यक्ष और उसके समर्थकों को पुलिस के जबरन पकडऩे पर धक्का-मुक्की हुई। पुलिसकर्मियों ने लाठियां फटकार कर छात्रों को खदेड़ा।
छात्रसंघ अध्यक्ष लोकेश गोदारा, लॉ कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष रचित कच्छावा, आसूराम डूकिया सहित अन्य छात्रों ने विश्वविद्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। गोदारा ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लगा ताला तोडकऱ उसे बंद कर दिया। बाद में उन्होंने कक्षाएं खाली कर दीं। बाद में छात्रों ने अपना ताला लाकर मुख्य द्वार पर जड़ दिया।

आप बुलाएं कलक्टर को..
सूचना मिलते ही सिविल लाइंस थाना पुलिस मौके पर पहुंची। छात्रों ने कहा कि चार महीने से कुलपति के कामकाज पर पाबंदी लगी है। कुलसचिव का तबदला हो चुका है। विश्वविद्यालय छात्र हितों की लगातार अनदेखी कर रहा है। कुलपति प्रकरण के चलते अन्तर कॉलेज सांस्कृतिक प्रतियोगिता नहीं हो सकी। छात्रसंघ उद्घाटन अटका हुआ है। पुलिस ने उन्हें समझाना चाहा तो गोदारा ने कहा कि आप कलक्टर को मौके पर बुलाएं हम उनसे ही बात करेंगे। बाद में एडीएम आनंदीलाल ज्ञापन लेने पहुंचे।

जबरन गिरफ्तारी पर हुई धक्का-मुक्की
दो घंटे तक ताला खुलते नहीं देख पुलिस ने अचानक पैंतरा बदला। पुलिसकर्मियों ने श्रीलाल तंवर के साथ हुए एक पुराने विवाद का हवाला देकर छात्रसंघ अध्यक्ष लोकेश गोदारा को पकड़ लिया। उन्होंने उसे घसीटते हुए जीप में डाल दिया। कुछ छात्रों ने विरोध जताया तो आरएएसी के जवानों ने लाठियां फटकार कर उन्हें भगा दिया। बाद में पुलिस ने छात्र अवतार, लॉ कॉलेज छात्रसंघ महासचिव धर्मेन्द्र बाज्या को भी पकड़ लिया। पुलिसकर्मियों और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

मुझे तो नेता बनना है, करो मुकदमा
पुलिस ने छात्रसंघ अध्यक्ष गोदारा को गेट नहीं खोलने पर मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी। इस पर गोदारा ने तपाक से जवाब दिया..मुझे कोई नौकरी नहीं करनी, बल्कि नेता बनना है। आप मुकदमो दर्ज करो मैं परवाह नहीं करता। इसके अलावा गोदारा ने मुख्य द्वार के सामने पत्थर की दीवार चुनवाने की बात भी कही।

शिक्षकों की कोशिशें बेकार
डीन छात्र कल्याण प्रो. अरविंद पारीक और चीफ प्रोक्टर प्रो.सुब्रतो दत्ता ने कुछ छात्रों को कलक्ट्रेट चलकर ज्ञापन देने के लिए तैयार किया। लेकिन कोशिशें बेकार रही। इस दौरान कुछ लोगों ने एडीएम सिटी के विश्वविद्यालय पहुंचने की बात कही तो छात्रों ने कहा अब तो हम उन्हें यहीं ज्ञापन देंगे।

अचानक कैसे हुआ आंदोलन?
विश्वविद्यालय में चार महीने से कुलपति नहीं है। ऐसे में छात्रों का एकाएक आंदोलन करना समझ से परे है। पुलिस और विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षक भी इसी बात को लेकर चर्चा करते दिखे।

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