हिन्दू धर्म की खूबियां, पढ़कर शेयर जरूर करेंगे

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हिन्दू धर्म की खूबियां, पढ़कर शेयर जरूर करेंगे
हिन्दू धर्म को संसार का सबसे पुराना धर्म कहा जाता है। यही कारण है कि इसे सनातन धर्म कहा गया है। सनातन यानी जो सदा से रहा हो। सदा से रहने का मतलब यह है कि जब सृष्टि की रचना हुई उस समय से लोग इस धर्म को मानते चले आए हैं। इसे देवताओं द्वारा स्थापित धर्म भी माना गया है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है तब-तब मैं धर्म की पुर्नस्थापना के लिए अवतार लेता हूं। यानी इसे भगवान द्वार स्थापित और संचालित भी माना गया है। इसे हिन्दू धर्म की पहली विशेषता मान सकते हैं क्योंकि इस धर्म को किसी मनुष्य द्वारा नहीं बल्कि देवताओं के द्वारा स्थापित और संचालित कहा गया है।





हिन्दू धर्म की प्राचीनता और महानता का सबसे बड़ा उदाहरण ऋग्वेद है। इसे हिन्दू धर्म का सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है। कहते हैं कि ऋग्वेद की उत्पत्ति भगवान विष्णु के मुख से हुई है। कहने का तात्पर्य यह है कि भगवान विष्णु ने पहली बार ऋग्वेद का पाठ किया था। इसके बाद ऋषि मुनियों के द्वारा यह पीढ़ी दर पीढी प्रचारित और प्रसारित होता गया। कहते हैं कि करीब 3800 साल पूर्व ऋग्वेद लिखित रूप में आया जबकि इससे पहले यह एक दूसरे से सुनकर ही प्रचारित होता रहा।

हिन्दू धर्म के अनुसार भक्त भगवान के द्वार पर यानी मंदिर में किसी भी समय जा सकते हैं। भगवान का ध्यान पूजन करने के लिए समय का कोई बंधन नहीं है। भक्त को जब समय मिले तभी वह अपने अराध्य की उपासना कर सकता है क्योंकि हिन्दू धर्म की मान्यता है कि ईश्वर कण-कण में और हर क्षण में हर स्थान पर मौजूद हैं।
स्त्री-पुरुष समानता का भाव जैसा हिन्दू धर्म में प्रकट होता है वैसा किसी अन्य धर्म में नहीं है। इसका प्रमाण भगवान शिव का यह अर्धनारीश्वर स्वरूप है जिसमें शिव के आधे अंग में देवी अदिशक्ति का वास माना गया है। इसी स्वरूप को आधार मानकर हिन्दू धर्म में जीवनसंगिनी को अर्धांगिनी भी कहा गया है।




हिन्दू धर्म उल्लास और आनंद का धर्म है। इसमें कभी भी और किसी के लिए भी शोक मनाने की बात नहीं है। यही वजह है कि हिन्दू धर्म में राम, कृष्ण के जन्मदिवस को उल्लास पूर्वक मनाया जाता है लेकिन उनके शरीर त्याग की तिथि तक का कहीं जिक्र नहीं मिलता है। कहीं कुछ जिक्र भी है तो गौण है क्योंकि हिन्दू धर्म कहता है कि राम और कृष्ण ने भले ही शरीर त्याग दिए हैं लेकिन वह सदा सर्वदा हमारे बीच उसी रूप में मौजूद हैं जिसे हम भक्ति भाव से महसूस कर सकते हैं। यानी हिन्दू धर्म में शोक का कहीं कोई स्थान नहीं है।

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